------------ सच्चा आशिक ---------------
एक नया लड़का राज कॉलेज में आया और आते ही पूजा की स्कूटी अपनी बाइक से ठोक डाली.
राज - सॉरी ... सॉरी....
राहुल – चलो यहाँ से ...
राहुल खीचते हुवे राज को ले गया
राज – रुको सॉरी तो बोल लेने दो ....
राहुल ने राज को सच्चाई बताई ... उस लड़की का नाम पूजा है थोड़ा नहीं पूरा पागल है ... लड़को से चिढ़ है उसको. अगर मैं समय पर नहीं पहुचता तो पता नहीं क्या करती .
राज – इतनी सुन्दर लड़की पागल ...
राहुल – नये हो ना धीरे – धीरे सब जान जावोगे
अगले दिन किसी से राज को पता चला की पूजा ने अपनी बाइक जला दी है क्योकि उसे किसी लड़के ने छुवा था ... अब राज को विश्वाश हो गया कि पूजा पागल है. लेकिन क्या वह बचपन से ही पागल है ?
बहुत मुश्किलों के बाद एक छोटी सी कहानी सामने आई. पूजा को किसी रोहित नाम के लड़के से प्यार था लेकिन उस लड़के ने उसके साथ टाइम पास की और मन भर गया तो उसे छोड़ दिया और आज किसी और के साथ .... जब पूजा की कहानी उसके दोस्तों ने सुना तो उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिए – सभी लड़के को छेड़ते है इसे लड़के ने छोड़ दिया ... नाईट के लिए मना कर दिया होगा ... अरे यार प्यार में सब चलता है ...
मैंने पहले ही मना किया था दूर रह लड़को और प्यार से ..... दोनों धोखेबाज होते है.
एक तो पूजा का दिल टुटा ऊपर से ये कमेंट और बाकी जो कसर था वो रोहित ने पूरा कर दिया ... पूजा के सामने अपने नये गर्लफ्रेंड के साथ .... किस दो ना ... मेरी जानू .. .... सभी लडकियों के जैसा पूजा का मन भी हुवा की या तो वो रोहित की ख्वाइस पूरी कर दे या खुद को मार डाले लेकिन पूजा के ऊपर बहुत सारी जिम्मेवारी थी सो सारे गम को ही दवा बना लिया और पूरे लड़के जाति से नफ़रत करने लगी ...
ये कहानी एक साल पहले की थी. रात में राज पूजा के बारे में सोचने लगा ..... उसे नीद नहीं आ रही थी वो पूजा से बात करना चाहता था . अगले दिन राज और राहुल बाइक से जा रहे थे तभी राज की नजर पूजा पर पड़ी ..
राज – राहुल उतर ...उतर ना ... हेलो पूजा.... आज पैदल स्कूटी कहा है .... चलो मैं छोड़ देता हूँ .... बोलोगे नहीं ... ओके ... राहुल तुम बाइक से चलो मैं पूजा के साथ आता हूँ ...
राहुल – मरेगा तू ....
राज – जा ना ... हा तो मिस पूजा....
पूजा – चुप ... जावो यहाँ से ...
राज – कहाँ जाऊ ... पूजा तुम्हें मालूम है कल रात से मुझे नींद नहीं ....
पूजा– मैंने बोला ना चुप .... (चिल्लाकर)
राह चलते युवक ने पुछा – मैडम जी कुछ हुवा क्या ...
राज – नहीं थोड़े नराज है मेरी मैडम ... आओ ना मना दो आओ ना ...
ऐसे ही पूजा को राज प्रतिदिन छेड़ने लगा ... मजाक ही मजाक में राज को पूजा से प्यार हो गया .... लेकिन पूजा की रट तो एक ही थी प्यार एक बार होता है बार – बार नहीं. मुझे किसी भी लड़के में कोई इंटरेस्ट नहीं है.
पूजा – बस तुम्हें वासना का भूख है ना मिटा लो .... तुम सब लड़के एक जैसे होते है ... मिटा लो अपनी प्यास और दूर हो जावो ... ( कहकर पूजा फूटफूट कर रोने लगी )
राज – सॉरी ... सॉरी ... पूजा मुझे तुमसे प्यार है ... रियली ... आई लव यू
पूजा – लेकन मुझे तुमसे प्यार नहीं है मेरा पीछा करना छोड़ दो ...
राज – एक दिन तुम्हें भी मुझसे प्यार हो जायेगा ... तुम ....
पूजा – बस ....
ऐसे ही नोक झोक चल रहे थे ... पूजा ने राज से छुटकारा पाने के लिए एक लड़के का सहारा लिया .... राज पूजाके सामने तो हसता रहता लेकिन अंदर ही अन्दर रोता रहता और एक दिन कॉलेज से गायब ...
पूजा ने सोचा चलो जान छुटी .... लेकिन कुछ दिन बाद उसकी शरारते याद आने लगी ... कभी बाग़ में माली से पानी का पाईप छीन कर पूजा पर पानी फेक देता ... कभी कागज पर लव यू लिख कर किसी बच्चे से उसके पास भेजता ... कभी पीछे से पूजा को डरा देता तो कभी आखों से इशारे करता ... राज की याद पूजा सताने लगी उसने राहुल से राज के बारे में पुछा ... पूजा अच्छी तरह जानती थी की दिल टूटने पर क्या होता है ...
राहुल को आश्चर्य हुवा .. उसने तुरंत राज को फोन लगाया लेकिन उसका नंबर बंद था .... राहुल राज के घर के तरफ निकल गया ...
घर में पता चला की सभी अस्पताल गये है ये बात राहुल ने पूजा को बता दी ...
राज पूजा के गम में खाना पीना छोड़ दिया था उसे भूख ही नहीं लगती थी पिता बहुत बड़े आदमी थे उनके पास वक्त नहीं था की वो बेटे को आकर देखे .... दिनभर बिजनेस ... राज की हालत बिगड़ने लगी ... और बिगड़ती ही जा रही थी ...
डॉक्टर ने पर्सनल राज के पिता को फोन किया ... कुछ ही देर में हॉस्पिटल में चार – पाच गाड़ियाँ आकर रुकी ...
पापा – तुमने ये क्या हालत बना रखी है ....
राज – पापा ... वो ..
डॉक्टर – आप मेरे साथ आये .. अकेले में ...
पापा – यस डॉक्टर ...
डॉक्टर – आप अपने बेटे से ऐसे बात करते है .... आपको पता है मौत से जूझ रहा है .....
पापा – मौत से ...
डॉक्टर – हा ब्रेन हेमरेज ....
पापा - ब्रेन हेमरेज ....
डॉक्टर – यस ... कभी आपने उसके पास समय दिया है ... कभी नहीं .... आपका फैमली डॉक्टर होने के नाते आपको सलाह देता हूँ ... आप सारा कुछ छोड़ अपने बेटे के साथ रहे नहीं ... तो दुनियां में पैसे से सब कुछ खरीदा तो जा सकता है लेकिन बेटा नहीं ...
पूजा – एक्सक्यूज मी ... कैन आई मिट विथ मिस्टर राज ...
पापा – तुम कौन हो ... मैं उसका पिता हूँ ... बोलो
पूजा – मैं पूजा .... कॉलेज .... में ... वो
पापा – तो ये सारी करतूत तुम्हारी है .... अगर मेरे बेटे को कुछ हुवा ना ... तो
डॉक्टर – आप शांत रहेंगे ... गुस्सा ना करे ... सब ठीक हो जायेगा ...
पूजा – राज को क्या हुवा है डॉक्टर ....
डॉक्टर – कुछ नहीं ... क्या राज तुमसे प्यार करता है ....
पूजा – हाँ ....
डॉक्टर - और तुम अब किसी और से प्यार करने लगी हो एम आई राईट .... डरो नहीं बोलो ...
पूजा – नहीं मुझे भी राज से प्यार है ....
डॉक्टर – रोवो नहीं सब ठीक हो जायेगा ...
पूजा – क्या राज ठीक है ?
डॉक्टर - हाँ ठीक है ... बेहोशी की हालत में तुम्हे ही पुकार रहा था ... पहले आप जाकर मिले ले एक प्लान के तहत ...
पापा – कैसा है मेरा बेटा ... सुना है आप आज कल नहीं खा रहे है ...
राज – पापा डाटेंगे तो नहीं ना ... मुझे भूख नहीं लगती है ...
पापा – अरे मैं क्यों डाटूगा ... आज आप मेरे हाथ से खाना खायेंगे ...
राज – पापा भूख नहीं है ...
पापा – इसका मतलब मेरे हाथ से नहीं खायेंगे और इनके हाथ से ....
राज – पूजा ... आप
राज उठ बैठा .... जिस जिश्म में बोलने की ताकत नहीं थी वो उठ बैठा था पापा और डॉक्टर ने भी प्यार की ताकत देखी ....
धीरे – धीरे राज की हालत ठीक होने लगी ... राज ने पूजा को अपने कमरे ले गया पूरा कमरा
पूजा के तस्वीर से भरा पड़ा था ... राज ने पूजा को उसका कुछ समान दिखाया ... कान का बाली जिसे उसने महंगे दाम होने के कारण नहीं खरीद पाई थी ... उसके पायल का टुटा हुवा घुंघरू ... उसका रुमाल और बहुत कुछ जिसे देख पूजा आवाक रह गई और राज से लिपट कर रो पड़ी ... कुछ दिनों बाद पूजा की शादी राज से हो गई. और दोनों ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे ... और रही बात रोहित की तो उसे एक लाइलाज बीमारी .... हो गई जिसका कोई ईलाज नहीं था वो दिन प्रतिदिन सुख कर काँटा होते जा रहा था क्योकि इस बीमारी में खून बनना बंद हो जाता है.
शिक्षा - आकर्षण में हमेशा धोखा मिलता है। आप इंतजार करे आपको सच्चा आशिक जरूर मिलेगा जो अपनी जान से भी अधिक आपको प्यार करेगा। तो इन्तजार करे .......
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